Sunday, 25 October 2026
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Swachh Vayu Survey 2026: दुर्ग-भिलाई की हवा में सुधार जरूरी

केंद्र सरकार की ओर से जारी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में छत्तीसगढ़ के शहरों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। राजधानी रायपुर ने बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देश भर के बड़े शहरों की श्रेणी में छठा स्थान प्राप्त किया है, जबकि औद्योगिक जुड़वां शहर दुर्ग-भिलाई अपनी श्रेणी में 17वें और कोरबा 10वें पायदान पर रहा। यह सर्वेक्षण वायु गुणवत्ता सुधार, प्रदूषण नियंत्रण उपायों और नागरिक भागीदारी के आधार पर हर साल शहरों की रैंकिंग तय करता है, और इसे देश भर के शहरी प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण मानक माना जाता है।

सर्वेक्षण का महत्व क्यों बढ़ता जा रहा है

बीते कुछ वर्षों में वायु प्रदूषण देश के लगभग हर बड़े शहर के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। ऐसे में केंद्र सरकार हर साल इस सर्वेक्षण के जरिए शहरों को उनके प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों के आधार पर रैंक करती है, ताकि नगर निगमों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बने और नागरिकों को भी अपने शहर की स्थिति की सही जानकारी मिल सके। यह रैंकिंग सिर्फ प्रतिष्ठा का विषय नहीं, बल्कि केंद्रीय योजनाओं के तहत मिलने वाले फंड और संसाधनों के आवंटन पर भी असर डालती है।

रायपुर की रैंकिंग कैसे बेहतर हुई

रायपुर नगर निगम और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त कोशिशों को इस उपलब्धि की मुख्य वजह माना जा रहा है। सड़कों की नियमित सफाई, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के सख्त नियम, हरित क्षेत्र का विस्तार और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने वाली नीतियां शहर के स्कोर में सुधार लाने में सहायक रहीं। रायपुर को मिले 189 अंक इस बात का संकेत हैं कि शहर ने प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों — वाहन उत्सर्जन, निर्माण धूल और कचरा जलाने की घटनाओं — पर नियंत्रण के मामले में लगातार प्रगति की है। इसके अलावा शहर में लगे वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग स्टेशनों से मिलने वाले रियल-टाइम डेटा ने भी प्रशासन को समय रहते जरूरी कदम उठाने में मदद की।

दुर्ग-भिलाई पीछे क्यों रह गया

दुर्ग-भिलाई क्षेत्र की स्थिति अलग है। यहां भिलाई इस्पात संयंत्र सहित कई भारी उद्योग मौजूद हैं, जिनसे निकलने वाला औद्योगिक उत्सर्जन शहर की वायु गुणवत्ता को प्रभावित करने वाला बड़ा कारक माना जाता है। इसके अलावा सड़कों पर बढ़ता वाहनों का दबाव, निर्माण गतिविधियों से उठने वाली धूल और सीमित हरित क्षेत्र भी 17वें स्थान पर रहने की वजहों में गिने जा रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक शहर होने के कारण दुर्ग-भिलाई के लिए वायु गुणवत्ता सुधारना रायपुर जैसे प्रशासनिक शहर की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि यहां प्रदूषण के स्रोत अधिक विविध और स्थायी प्रकृति के हैं। भारी उद्योगों से जुड़े उत्सर्जन को नियंत्रित करने में समय भी अधिक लगता है और लागत भी ज्यादा आती है, जिससे सुधार की रफ्तार धीमी रहती है।

नागरिकों के स्वास्थ्य पर असर

खराब वायु गुणवत्ता का सीधा असर सांस संबंधी बीमारियों, एलर्जी और हृदय रोगों के बढ़ते मामलों पर पड़ता है। डॉक्टरों के मुताबिक औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास रहने वाले बच्चों और बुजुर्गों में सांस की तकलीफ की शिकायतें अधिक देखी जाती हैं। सर्दियों के मौसम में जब हवा में नमी बढ़ती है, तब प्रदूषक तत्व वातावरण में अधिक समय तक टिके रहते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। ऐसे में दुर्ग-भिलाई नगर निगम के लिए यह रैंकिंग सिर्फ एक सर्वेक्षण का आंकड़ा नहीं, बल्कि नागरिकों की सेहत से जुड़ा गंभीर मुद्दा है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।

सुधार के लिए क्या किया जा सकता है

विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि दुर्ग-भिलाई में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए औद्योगिक इकाइयों में उत्सर्जन नियंत्रण उपकरणों की सख्त निगरानी, सड़कों की नियमित सफाई-छिड़काव, निर्माण स्थलों पर अनिवार्य ग्रीन नेट का इस्तेमाल और शहर के भीतर हरित पट्टी बढ़ाना जरूरी है। इसके साथ ही सार्वजनिक परिवहन और साइकिल ट्रैक जैसी सुविधाएं बढ़ाकर निजी वाहनों पर निर्भरता कम की जा सकती है। कुछ विशेषज्ञ यह भी सुझाव देते हैं कि औद्योगिक इकाइयों और नगर निगम के बीच नियमित समन्वय बैठकें हों, ताकि उत्सर्जन के आंकड़े पारदर्शी तरीके से सामने आएं और सुधार की दिशा में ठोस कार्ययोजना बन सके।

अन्य शहरों से तुलना

गौरतलब है कि इस सर्वेक्षण में कोरबा, जो खुद एक बड़ा औद्योगिक जिला है, अपनी श्रेणी में 10वें स्थान पर रहा — यानी दुर्ग-भिलाई की तुलना में बेहतर प्रदर्शन। इससे यह संकेत मिलता है कि औद्योगिक शहर होने के बावजूद बेहतर रैंकिंग हासिल करना असंभव नहीं है, बशर्ते प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सतत निगरानी बनी रहे।

आगे की चुनौती

रायपुर की सफलता यह दिखाती है कि सतत प्रयासों से रैंकिंग में सुधार संभव है। अब सवाल यह है कि क्या दुर्ग-भिलाई नगर निगम अगले सर्वेक्षण में इसी तरह की प्रगति दिखा पाएगा। नगर निगम चुनाव नजदीक होने के चलते वायु गुणवत्ता का मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन सकता है, क्योंकि नागरिक अब सीधे तौर पर स्वच्छ हवा को अपने जीवन की गुणवत्ता से जोड़कर देखने लगे हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दुर्ग-भिलाई प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाता है।