मुंबई| 4 अक्टूबर 2026
अभिनेता संजय दत्त ने गांधी जयंती के मौके पर देश के हालात को लेकर चिंता जताई है। शेखर सुमन के शो “शेखर टुनाइट” में उन्होंने कहा कि भारत के लोग दिल के बड़े और मेहमाननवाज हैं, लेकिन अब देश में पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती। इसके बाद उन्होंने अपने मशहूर किरदार “मुन्ना भाई” के अंदाज में प्रधानमंत्री बनने की कल्पना की और कई मुद्दों पर हल्के-फुल्के तंज भी कसे।
“फिर लौटें वही दिन”
संजय दत्त ने कहा कि भारत ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है और यहां के लोग मेहमानों का खुले दिल से स्वागत करते हैं। लेकिन उन्हें लगता है कि अब पहले जैसा सुकून नहीं रहा। उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना की कि देश में फिर वही दिन लौटें, जब लोगों के बीच शांति और भाईचारा था।
पांच मिनट के “प्रधानमंत्री”
शो के आखिर में उनसे कहा गया कि वे पांच मिनट के लिए प्रधानमंत्री बनकर जनता को संबोधित करें। संजय तुरंत मुन्ना भाई के अंदाज में आ गए। उन्होंने मजाक में कहा कि इतने बड़े देश की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर है और प्रधानमंत्री बनने की खुशी में वे विदेश नहीं जाएंगे, बल्कि लोगों के बीच ही रहेंगे।
“चौथे बंदर की जरूरत”
अपने भाषण में उन्होंने महात्मा गांधी के तीन बंदरों का जिक्र किया, जो बुरा न देखने, न सुनने और न कहने का संदेश देते हैं। संजय ने कहा कि आज एक चौथे बंदर की जरूरत है, यानी अगर कोई गलत चीज देखे तो उसे सुधारने की कोशिश भी करे। उन्होंने सवाल किया कि अगर हर कोई आंख, कान और मुंह बंद करके बैठ जाएगा, तो देश कैसे चलेगा।
तस्वीरों पर चुटकी
सरकारी और सार्वजनिक जगहों पर नेताओं की तस्वीरों को लेकर भी उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि प्रधानमंत्री बनकर वे ऐसी जगहों पर प्रधानमंत्री की तस्वीरें कम करेंगे, क्योंकि लोगों को देश की तस्वीर दिखनी चाहिए। उनके मुताबिक जहां अपनी तस्वीर लगाने का मन हो, वहां महात्मा गांधी की तस्वीर लगानी चाहिए, क्योंकि गांधी जी के विचार ज्यादा जरूरी हैं।
ट्रंप को “गांधीगिरी” की सलाह
संजय दत्त ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र मजाक में “ट्रंप मामू” कहकर किया। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाना है तो दुनिया से जुड़कर चलना होगा। ट्रंप को “गांधीगिरी” अपनाने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि शांति प्यार से आती है और दुनिया में मिसाइलें पहले से बहुत हैं, अब प्यार फैलाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी को धमकाने या मिसाइल भेजने का मन हो तो पहले गुलदस्ता भेजना चाहिए, और लड़ने के बजाय उसे घर बुलाकर चाय पर बात करनी चाहिए।
उनका यह अंदाज फिल्म “लगे रहो मुन्ना भाई” की याद दिलाता है, जिसमें मुन्ना भाई गांधी जी के विचारों से “गांधीगिरी” के जरिए समस्याएं सुलझाता है।



