केंद्र सरकार ने निजी क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों को एक बड़ी राहत दी है। EPFO के तहत पेंशन कटौती के लिए अनिवार्य सैलरी लिमिट को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया है। यह नया नियम आज से लागू हो चुका है।
किसे मिलेगा फायदा
पहले जो कर्मचारी 15,000 रुपये से अधिक शुरुआती सैलरी पर नौकरी में शामिल होते थे, वे अनिवार्य पीएफ और पेंशन सुरक्षा के दायरे से बाहर रह जाते थे। अब 15,000 से लेकर 25,000 रुपये प्रति महीना सैलरी ब्रैकेट में आने वाले करीब 51 लाख कर्मचारियों को कानूनन पूरी सोशल सिक्योरिटी का लाभ मिलेगा। सरकार के मुताबिक इस फैसले से सालाना करीब 11,339 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ सरकार पर पड़ेगा।
पेंशन का गणित कैसे समझें
EPS यानी एम्प्लॉई पेंशन स्कीम के तहत पेंशन कंट्रीब्यूशन कर्मचारी की सैलरी से नहीं बल्कि नियोक्ता के योगदान से जाता है। मासिक पेंशन कैलकुलेट करने का फॉर्मूला है — पेंशन योग्य सैलरी × पेंशन योग्य सर्विस के वर्ष ÷ 70। उदाहरण के लिए, अगर किसी की उम्र 25 साल है और बेसिक+डीए 25,000 रुपये है, तो पेंशन योग्य सेवा 35 साल मानी जाएगी और अनुमानित मासिक पेंशन करीब 12,500 रुपये बनेगी। वहीं 30 साल की उम्र में शुरुआत करने वालों को करीब 10,714 रुपये मासिक पेंशन का अनुमान है।
2014 के बाद पहला बड़ा बदलाव
गौरतलब है कि इससे पहले सितंबर 2014 में इस सैलरी लिमिट को बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया था। सरकार का कहना है कि बीते वर्षों में वेतन में लगातार वृद्धि, बढ़ती आय और संगठित क्षेत्र में रोजगार बढ़ोतरी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। अगले पांच वर्षों में इस फैसले पर कुल खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी पर असर
हालांकि इस फैसले से रिटायरमेंट के बाद ज्यादा सामाजिक सुरक्षा मिलेगी, लेकिन कुछ जानकारों का मानना है कि इससे कर्मचारियों की मौजूदा टेक-होम सैलरी में मामूली कमी भी आ सकती है, क्योंकि अब ज्यादा राशि पीएफ और पेंशन खाते में जाएगी।



