Monday, 26 October 2026
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छत्तीसगढ़

बानबरद में पंडवानी महासम्मेलन: मुख्यमंत्री साय ने तीजन बाई के नाम पर लोककला अलंकरण का ऐलान किया, 70 दलों को 25-25 हज़ार

दुर्ग/रायपुर, 24 अक्टूबर 2026

अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस पर दुर्ग ज़िले के अहिवारा क्षेत्र के गाँव बानबरद में पंडवानी महासम्मेलन हुआ। इसमें प्रदेश भर से लोक कलाकार जुटे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंच से पद्म विभूषण तीजन बाई के नाम पर लोककला अलंकरण शुरू करने की घोषणा की, जो इसी साल राज्योत्सव में दिया जाएगा।

तीजन बाई की याद को स्थायी रूप देने की पहल

साय ने कहा कि तीजन बाई ने अपनी साधना से पंडवानी को देश-दुनिया के मंचों तक पहुँचाया। उन्होंने समझाया कि इस विधा में कलाकार गायन, अभिनय और भाव-भंगिमाओं के सहारे महाभारत के पात्रों को मंच पर जीवंत कर देता है। उनकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सरकार दो और क़दम उठाएगी। उनके गृह ग्राम गनियारी को “कला ग्राम” के रूप में विकसित किया जाएगा। वहाँ के हाईस्कूल का नाम तीजन बाई के नाम पर रखने की पहल भी होगी।

70 दलों को प्रोत्साहन राशि

आयोजकों की माँग पर मुख्यमंत्री ने महासम्मेलन में शामिल 70 दलों को 25-25 हज़ार रुपये देने की घोषणा की। इस हिसाब से कुल राशि 17.5 लाख रुपये बनती है। इन दलों में पंडवानी कलाकारों के साथ चार पंथी और तीन आदिवासी नृत्य दल भी हैं।

बानबरद के लिए स्कूल और सड़क की सौग़ात

स्थानीय माँगों पर साय ने बानबरद के मिडिल स्कूल को हाईस्कूल बनाने की घोषणा की। साथ ही अहिवारा रेलवे क्रॉसिंग से अटल परिसर तक बीटी (डामर) सड़क बनाने का ऐलान भी किया।

ज्ञानश्रोत कला मंच की सराहना, फ़िल्म जगत पर भी बात

मुख्यमंत्री ने ज्ञानश्रोत कला मंच के 46 वर्षों के निरंतर काम को बड़ी उपलब्धि बताया। उनके मुताबिक़ यह संस्था लोककलाओं को ज़िंदा रखने, कलाकारों को मंच देने और नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने में लगी रही है। उन्होंने पद्मश्री डॉ. उषा बारले और मंच से जुड़े सभी लोगों को आयोजन की बधाई दी।

कलाकारों के लिए रोज़गार के नए रास्तों की बात भी उन्होंने की। साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा और स्थानीय कलाकारों को मंच देने के लिए छत्तीसगढ़ फ़िल्म विकास बोर्ड बना है। नवा रायपुर में फ़िल्म सिटी विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है। उनका कहना था कि इससे कलाकारों और युवाओं को रोज़गार और रचनात्मक अवसर मिलेंगे।

मंच से अन्य वक्ता

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि पंडवानी, पंथी, भरथरी, ददरिया और सुवा सिर्फ़ गीत-नृत्य नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा हैं। उन्होंने कलाकारों से महासम्मेलन की परंपरा को इसी उत्साह से आगे बढ़ाने का आग्रह किया। विधायक रिकेश सेन ने भी सभा को संबोधित किया। स्वागत भाषण में डॉ. उषा बारले ने कलाकारों से जुड़ी कई माँगें मुख्यमंत्री के सामने रखीं। कार्यक्रम में दुर्ग ग्रामीण के विधायक ललित चंद्राकर, साजा के विधायक ईश्वर साहू, अन्य जनप्रतिनिधि, लोक कलाकार और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।