Monday, 26 October 2026
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छत्तीसगढ़

75 दिन का बस्तर दशहरा समापन की ओर: मुरिया दरबार में राष्ट्रपति मुर्मू का कार्यक्रम, प्रदेश भर में नवरात्रि की रौनक

बस्तर छत्तीसगढ़ | 25 अक्टूबर 2026

दुनिया के सबसे लंबे पर्वों में गिना जाने वाला 75 दिनी बस्तर दशहरा जगदलपुर में मुरिया दरबार के साथ पूरा होता है। इस बार इसे ख़ास बनाती है राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी। वे दो दिन के छत्तीसगढ़ दौरे पर आईं, जिसमें 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार और बस्तर दशहरा के जनसभा कार्यक्रम में शामिल होना तय था। उधर प्रदेश के बाक़ी हिस्सों में नवरात्रि और विजयादशमी के आयोजन भी पूरे उत्साह से हुए।

क्या है बस्तर दशहरा

बस्तर दशहरा क़रीब 75 दिन चलता है, श्रावण अमावस्या पर पाट जात्रा की रस्म से शुरू होता है, इसके केंद्र में देवी दंतेश्वरी हैं और इसमें रावण का पुतला नहीं जलाया जाता। इस साल उत्सव की शुरुआत 12 अगस्त को पाट जात्रा से हुई। एक रिपोर्ट के अनुसार रथ-निर्माण की यह परंपरा 618 साल पुरानी है। यानी देश के ज़्यादातर हिस्सों में मनाए जाने वाले रावण दहन वाले दशहरे से यह पर्व बिल्कुल अलग पहचान रखता है। 

अनुष्ठानों की लंबी कड़ी

इस पर्व में रस्मों का क्रम महीनों तक चलता है। 24 सितंबर को डेरी गढ़ई की रस्म हुई, 10 अक्टूबर की रात काछन गादी में देवी से दशहरा की अनुमति ली गई, 11 अक्टूबर को कलश स्थापना और जोगी बिठाई हुई, और 13 से 18 अक्टूबर तक फूल रथ की परिक्रमा निर्धारित थी। 19 अक्टूबर को निशा जात्रा, 20 को मावली परघाव, 21 को भीतर रैनी और 22 को बाहर रैनी तय थी, जिसमें रथ को रात में क़रीब तीन किलोमीटर दूर कुम्हड़ाकोट ले जाया जाता है। 

मुरिया दरबार: जनसंवाद की परंपरा

मुरिया दरबार बस्तर दशहरा की प्रमुख समापन परंपराओं में है। ऐतिहासिक रूप से यह बस्तर राजपरिवार से जुड़ा रहा और स्थानीय समुदायों को अपनी समस्याएँ रखने का मंच देता था। इसे बस्तर के आदिवासी समुदायों की सदियों पुरानी लोकतांत्रिक व्यवस्था की जीवित विरासत कहा जाता है। मुख्यमंत्री भी 2009-10 से लगभग हर मुरिया दरबार में शामिल होते रहे हैं, और पहले के दरबारों में माँझी-चालकी जैसे पदाधिकारियों के लिए सुविधाओं की घोषणाएँ हो चुकी हैं। 

राष्ट्रपति का दौरा

राष्ट्रपति मुर्मू मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निमंत्रण पर बस्तर दशहरा में आ रही थीं। बस्तर दशहरा का मुख्य सार्वजनिक कार्यक्रम जगदलपुर के लालबाग मैदान में होना था, और वे मुरिया दरबार में बस्तर के अलग-अलग आदिवासी समूहों के प्रमुखों से संवाद भी करने वाली थीं। दौरे के पहले दिन रायपुर में नुआखाई से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होना और एक स्मारक सिक्का जारी करना तय था। UNI के मुताबिक़ इस यात्रा से बस्तर की विशिष्ट जनजातीय परंपराओं की ओर राष्ट्रीय ध्यान जाएगा। यह इसी साल बस्तर में उनकी दूसरी मौजूदगी है, क्योंकि फरवरी में वे जगदलपुर पहुँचकर बस्तर पंडुम का उद्घाटन कर चुकी हैं।

श्रद्धालुओं के लिए इंतज़ाम

जगदलपुर में 10 से 22 अक्टूबर तक रोज़ दोपहर 3 बजे से आधी रात तक आठ मार्गों पर चारपहिया और भारी वाहनों का प्रवेश बंद रखा गया। रोटरी क्लब जगदलपुर ने 11 से 15 अक्टूबर तक जगदलपुर और दंतेवाड़ा के बीच माँ दंतेश्वरी के दर्शन के लिए निःशुल्क बस सेवा चलाई। दंतेवाड़ा मंदिर में मोबाइल फ़ोन पर रोक और पार्किंग के तय स्थान बनाए गए। 

प्रदेश भर में नवरात्रि की धूम

शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू हुई, अष्टमी 19 अक्टूबर को रही और विजयादशमी 20 अक्टूबर को मनाई गई। डोंगरगढ़ में माँ बमलेश्वरी का नवरात्रि मेला 11 से 20 अक्टूबर तक चला, जहाँ पदयात्रियों के लिए एनएच-53 पर अलग लेन और दस पार्किंग स्थल तय किए गए तथा भारी वाहनों पर रोक रही। रतनपुर के महामाया धाम में मनोकामना ज्योति कलश जलाए गए, और रायपुर के चंपारण में एक ही पंडाल में छत्तीसगढ़ की 36 देवियों के दर्शन कराए गए। 

रावण दहन के नए आयोजन

इस बार कई शहरों में रावण दहन के आयोजन नए रूप में दिखे। बिलासपुर में पहली बार नगर निगम ने साइंस कॉलेज मैदान में दशहरा उत्सव आयोजित किया, जबकि धमतरी में निगम ने एकलव्य खेल मैदान पर 45 फ़ुट का रावण जलाने की तैयारी की। चंपा के भालेराव मैदान में 20 अक्टूबर को 50 फ़ुट का पुतला जलना था, और भाटापारा में 51 फ़ुट के रावण के साथ लगातार एक घंटे आतिशबाज़ी की योजना थी। 

परंपराएँ और सुरक्षा

जशपुर के राजसी दशहरे में नगाड़ा बजाने की परंपरा 27 पीढ़ियों से चली आ रही बताई गई है, और महासमुंद के गाड़ाबेड़ा की छत्तीसगढ़ी रामलीला को रामायण के वैश्विक विश्वकोश में जगह मिली है। सुरक्षा के लिहाज़ से कई जगह शांति समितियों की बैठकें हुईं; बलरामपुर-रामानुजगंज में दुर्गा पूजा के लिए डीजे पर रोक और विसर्जन का मार्ग व समय तय करने की बात हुई, और जशपुर के पत्थलगाँव में पंडालों में सीसीटीवी और फ़ायर ब्रिगेड अनिवार्य किए गए।