Monday, 26 October 2026
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छत्तीसगढ़

नवा रायपुर में 1 से 3 नवंबर तक राज्योत्सव: “नक्सल मुक्त” होगी थीम, अमित शाह मुख्य अतिथि

रायपुर | 25 अक्टूबर 2026

छत्तीसगढ़ अपने स्थापना दिवस के जश्न की तैयारियों में जुट गया है। इस बार तीन दिवसीय राज्योत्सव 1 से 3 नवंबर तक नवा रायपुर के ग्राम तूता स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उद्योग एवं व्यापार परिसर में होगा। राज्य का गठन 1 नवंबर 2000 को हुआ था, यानी प्रदेश इस साल अपनी स्थापना की 26वीं वर्षगाँठ मना रहा है। इस भव्य आयोजन को लेकर शासन स्तर पर हलचल तेज़ है और अधिकारियों को तय समय-सीमा में काम पूरा करने के सख़्त निर्देश दिए गए हैं।

राज्योत्सव का महत्व

छत्तीसगढ़ 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर स्वतंत्र राज्य बना था। तब से हर साल इसी तारीख़ को स्थापना दिवस मनाया जाता है। राजधानी में होने वाला राज्योत्सव इसका सबसे बड़ा सरकारी आयोजन माना जाता है, जहाँ प्रदर्शनी, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और सम्मान समारोह एक ही परिसर में देखने को मिलते हैं। पिछले साल राज्य के 25वें स्थापना समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की ख़बर आई थी, जबकि इस बार केंद्रीय गृहमंत्री मुख्य अतिथि होंगे। 

मुख्य सचिव ने ली समीक्षा बैठक

तैयारियों की समीक्षा के लिए मंत्रालय महानदी भवन में उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव विकासशील ने की। बैठक में काम की रफ़्तार, प्रदर्शनी, सुरक्षा और यातायात प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने सभी विभागों से कहा कि वे 22 अक्टूबर तक अपनी तैयारियाँ पूरी कर लें और प्रदर्शनी की विस्तृत जानकारी व कार्ययोजना भी पेश करें। यह समय-सीमा अब बीत चुकी है, इसलिए सबकी नज़र आयोजन स्थल पर अंतिम चरण के कामों पर टिकी है। 

विकास की झलक वाली प्रदर्शनी

इस बार की केंद्रीय थीम में ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस और मानव पूँजी विकास जैसे विषय शामिल हैं, जबकि विकसित भारत और “अंजोर छत्तीसगढ़” को प्रमुखता दी जाएगी। छत्तीसगढ़ी में “अंजोर” का अर्थ उजाला है। प्रदर्शनी के ज़रिए राज्य की अब तक की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को सामने रखा जाएगा। पूरे राज्योत्सव का नोडल विभाग संस्कृति विभाग को बनाया गया है। इससे संकेत मिलता है कि आयोजन सिर्फ़ सांस्कृतिक नहीं रहेगा, बल्कि निवेश, उद्योग और मानव संसाधन के सहारे राज्य की छवि भी पेश करेगा। 

नक्सल मुक्त थीम और गृहमंत्री की मौजूदगी

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि इस बार राज्योत्सव की थीम “नक्सल मुक्त राज्य” रखी गई है और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस साल प्रदेश से नक्सल गतिविधियों के कमज़ोर पड़ने की ख़बरें आती रही हैं; मार्च में एक रिपोर्ट के अनुसार 108 माओवादियों ने छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण किया था। थीम का चुनाव इसी बदली तस्वीर की ओर इशारा करता है। 

स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इस बार छत्तीसगढ़ के स्थानीय कलाकारों और लोकनृत्य दलों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि लोक संस्कृति और ज़मीनी प्रतिभाओं को बड़ा मंच मिले। पारंपरिक कला, संगीत और लोकनृत्य मुख्य आकर्षण रहेंगे। साथ ही युवाओं और आम लोगों की माँग को देखते हुए देश के तीन चर्चित बाहरी कलाकारों को भी बुलाया जा रहा है। अभी तक उपलब्ध रिपोर्टों में इन कलाकारों के नाम सामने नहीं आए हैं। 

40 हस्तियों को राज्य अलंकरण

राज्योत्सव में अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करने वाली हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा। कुल 40 राज्य-स्तरीय अलंकरण और पुरस्कार दिए जाएँगे। इनके लिए पारदर्शी चयन प्रक्रिया समय रहते पूरी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

किस विभाग के ज़िम्मे क्या

आयोजन स्थल पर निर्माण की ज़िम्मेदारी कई विभागों में बाँटी गई है। मुख्य मंच, डोम, पंडाल और स्टॉल का काम सीएसआईडीसी देखेगा और एनआरडीए भी व्यवस्थाएँ सँभालेगा। सुरक्षा और बैरिकेडिंग की मुख्य ज़िम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को मिली है, जबकि प्रचार-प्रसार की कमान जनसंपर्क विभाग और चिप्स के पास रहेगी। नागरिक सुविधाओं का ज़िम्मा रायपुर नगर निगम के पास है। पेयजल, स्वच्छता और सिटी बस संचालन एनआरडीए और निगम मिलकर देखेंगे, पुलिस सुरक्षा, यातायात, पार्किंग और अग्निशमन सँभालेगी, और स्वास्थ्य व ऊर्जा विभाग निर्बाध सेवाएँ देंगे। 

भीड़ और मौसम की चुनौती

बड़ी संख्या में लोगों के पहुँचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा, यातायात और नागरिक सुविधाओं के व्यापक इंतज़ाम किए जा रहे हैं, ताकि आने वालों को असुविधा न हो। आयोजकों के लिए मौसम पर नज़र रखना भी ज़रूरी होगा, क्योंकि 24 अक्टूबर की एक रिपोर्ट में 27 अक्टूबर से कई ज़िलों में बादल बरसने की बात कही गई है। खुले मैदान के बड़े आयोजन में पंडाल, पार्किंग और आवाजाही की व्यवस्था ऐसे मौसम में सबसे ज़्यादा परखी जाती है। 

ज़िलों में भी रोशनी

राजधानी के अलावा ज़िला स्तर पर भी आयोजन होंगे। बिलासपुर में ज़िला-स्तरीय राज्योत्सव 2 नवंबर को होगा; 1 से 3 नवंबर तक वहाँ सरकारी दफ़्तर रोशनी से सजाए जाएँगे और 2 नवंबर को भव्य मंच तैयार होगा। 

अब लोगों की निगाहें तीन दिवसीय कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की अंतिम सूची पर टिकी हैं। जैसे-जैसे 1 नवंबर क़रीब आएगा, तैयारियों की असली तस्वीर भी साफ़ होती जाएगी।