Monday, 26 October 2026
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दुर्ग जिले में 150 वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी, राजनीतिक सरगर्मी तेज

दुर्ग जिले में नगरीय निकाय चुनाव 2026 को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। जिले के प्रमुख नगर निगमों — भिलाई, रिसाली और भिलाई-चरौदा — में कुल 150 वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया भिलाई स्थित कला मंदिर में जिला कलेक्टर एवं स्थानीय निर्वाचन अधिकारी की मौजूदगी में संपन्न हुई। इस प्रक्रिया के तहत तीनों निगमों में पार्षद पद के साथ-साथ महापौर पद के लिए भी आरक्षण की तस्वीर साफ हो गई है।

तीन निगमों में अलग-अलग समीकरण

रिसाली नगर निगम, जो 2019 में भिलाई निगम से अलग होकर स्वतंत्र निकाय बना था, वहां वर्तमान में कांग्रेस की शशि सिन्हा महापौर हैं। इस निगम में कुल 40 वार्ड हैं, जिनमें पिछली बार कांग्रेस ने 21 वार्डों पर जीत दर्ज की थी। यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से दिलचस्प इसलिए भी माना जाता है क्योंकि यह दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में आता है, जहां फिलहाल भाजपा विधायक हैं। महापौर पद अनुसूचित जाति महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है।

भिलाई-चरौदा नगर निगम का चुनाव भी खास तौर पर अहम माना जा रहा है, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का निवास इसी क्षेत्र में है। पिछले चुनाव में यहां कांग्रेस ने 40 में से 19 वार्ड जीते थे और बाद में दो निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से बहुमत जुटाकर महापौर पद हासिल किया था।

दुर्ग-भिलाई क्षेत्र के लिए क्या मायने

तीनों निगमों को मिलाकर कुल 150 वार्डों में पार्षद और तीन महापौर चुने जाने हैं। यह पूरी प्रक्रिया दुर्ग-भिलाई क्षेत्र के शहरी प्रशासन की दिशा तय करने वाली है, क्योंकि इन्हीं निकायों के जरिए सड़क, पानी, सफाई, स्ट्रीट लाइट और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े फैसले लिए जाते हैं। आरक्षण प्रक्रिया पूरी होते ही संभावित उम्मीदवारों ने अपने-अपने वार्डों में जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है।

मौजूदा पार्षदों पर असर

आरक्षण में बदलाव के चलते कई मौजूदा पार्षदों को अपने परंपरागत वार्ड से चुनाव लड़ने में दिक्कत आ सकती है। ऐसे में कुछ नेता नए वार्डों की तलाश में हैं, तो कुछ अपने परिवार के किसी सदस्य को मैदान में उतारने पर विचार कर रहे हैं। राजनीतिक दलों के लिए यह चुनौती है कि वे आरक्षित वार्डों में सक्षम और स्वीकार्य उम्मीदवार तलाशें।

प्रशासनिक तैयारियां

जिला प्रशासन ने आरक्षण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित की। आरक्षण से जुड़ी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए भी नागरिकों और उम्मीदवारों को निर्धारित समय दिया गया है, ताकि किसी भी विसंगति की स्थिति में सुधार किया जा सके।

आगे क्या

आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब नामांकन, प्रचार और मतदान की तारीखों का इंतजार है। दुर्ग-भिलाई क्षेत्र के नागरिकों के लिए यह चुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि इसी दौरान शहर के अगले पांच वर्षों के विकास की दिशा तय होगी।