छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने कुछ महीने पहले ही राज्य सरकार को इस मुद्दे पर आगाह करना शुरू कर दिया था। संगठन ने जिला कलेक्टर के माध्यम से सरकार को औपचारिक ज्ञापन सौंपते हुए कहा था कि पिछले कुछ समय में डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जिससे बसों के संचालन की लागत काफी बढ़ गई है। इसके साथ ही स्पेयर पार्ट्स, मेंटेनेंस, बीमा और स्टाफ के वेतन का खर्च भी बढ़ा है, जबकि यात्री किराया वर्षों से लगभग स्थिर बना हुआ है। इसी असंतुलन को दूर करने के लिए महासंघ ने साधारण बसों के किराए में 75 प्रतिशत और डिलक्स बसों के किराए में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी की मांग रखी। संगठन ने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि यदि सरकार ने समय रहते इस पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो आने वाले समय में प्रदेशव्यापी आंदोलन की राह अपनाई जाएगी।
यातायात महासंघ की पहली चेतावनी: डीजल महंगा, किराया बढ़ाने की मांग



