13-14 अक्टूबर की रात ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी तेल कंपनी अरामको के मुख्यालय को निशाना बनाया। हमला पूर्वी शहर दहरान में हुआ और सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने इमारत में “सीमित आग” की बात कही। अधिकारियों के मुताबिक़ इमारत की ऊपरी तीन मंज़िलें क्षतिग्रस्त हुईं और कोई हताहत नहीं हुआ। एक अधिकारी ने बताया कि प्रभावित हिस्सों में कंपनी के सीईओ का दफ़्तर भी था। ब्लूमबर्ग के हवाले से ख़बर है कि हमले के बाद अरामको कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा गया। हूतियों ने इसे यमन की राजधानी सना पर “सऊदी आक्रामकता” का जवाब बताया। इससे पहले शनिवार को रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में 13 लोग मारे गए थे, जो 2015 के बाद राज्य पर सबसे घातक हमला बताया गया। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वे विचार कर रहे हैं कि अमेरिका हूतियों के ख़िलाफ़ सऊदी हमलों में शामिल हो या नहीं। तेल-आयातक देश होने के नाते भारत के लिए भी ऊर्जा बाज़ार की यह अस्थिरता चिंता का विषय हो सकती है।
सऊदी अरामको के मुख्यालय पर हूती हमला, रियाद एयरपोर्ट हमले के बाद तनाव चरम पर



