पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। सऊदी अरब ने दावा किया है कि हूती विद्रोहियों ने इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का के करीब ड्रोन हमले की कोशिश की, हालांकि हूती विद्रोहियों ने इस आरोप से इनकार करते हुए कहा है कि उनका निशाना तेल सुविधाएं और सैन्य ठिकाने थे, न कि धार्मिक स्थल।
क्या है मक्का डिफेंस पैक्ट
पिछले महीने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौता हुआ था, जिसे ‘मक्का डिफेंस पैक्ट’ कहा जा रहा है। इस समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे सभी पर हमला माना जाएगा। यह समझौता सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करने के मकसद से किया गया था।
पाकिस्तान की दुविधा
हूती हमले की कोशिश के बाद अब इस समझौते की पहली बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान मक्का समझौते के तहत अपना फर्ज निभाएगा, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि मक्का की सुरक्षा के लिए अलग से किसी समझौते की जरूरत नहीं, क्योंकि हर मुसलमान इसकी रक्षा के लिए पहले से बाध्य है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हमले की कोशिश को कायरतापूर्ण बताया और रियाद के साथ एकजुटता जताई, लेकिन पाकिस्तानी सैन्य प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि यह गठबंधन रक्षात्मक प्रकृति का है, आक्रामक कार्रवाई के लिए नहीं।
सऊदी अरब को मिली सिर्फ सहानुभूति
विश्लेषकों का कहना है कि जब सऊदी अरब को वास्तव में सैन्य सहयोग की जरूरत पड़ी, तो पाकिस्तान ने अब तक केवल बयानबाजी तक ही खुद को सीमित रखा है, ठोस सैन्य मदद का कोई वादा सामने नहीं आया। इससे पहले भी जब हूती विद्रोही पाकिस्तान पर हमला कर रहे थे, तब पाकिस्तान ने कहा था कि मक्का समझौता पुराने विवादों पर लागू नहीं होता।



